हमारे विंग कमांडर अभिनंदन का सकुशल भारत लौटना अपने आप में अनुपम घटना है। यों तो जिनीवा अभिसमय के मुताबिक सारी दुनिया में यह परंपरा चली आ रही है कि जब एक देश के फौजी दूसरे देश में पकड़े जाते हैं तो उनकी देखभाल वह दुश्मन देश करता है और उन्हें वह सुरक्षित अपने देश में लौटा देता है लेकिन भारत और पाकिस्तान के रिश्ते कुछ ऐसे रहे हैं कि युद्धबंदियों को वहां बेहद ज्यादा तकलीफ दी जाती है और उनकी नृशंस हत्या भी कर दी जाती है लेकिन अभिनंदन का लौटना कई दृष्टियों में अपने ढंग से अलग है।
एक तो यह कि अभिनंदन ने पाकिस्तान का युद्धक जहाज मार गिराया, इसके बावजूद उसने उसे वापस लौटा दिया। दूसरा, अभिनंदन को तुरंत लौटाया गया वरना ऐसे फौजियों को महिनों और सालों तक टांग कर रखा जाता है। तीसरा, अभिनंदन को लौटाने की बात शुरु करते ही पाकिस्तान ने बदले में बातचीत की सौदेबाजी की, जिस पर भारत ने कोई ध्यान नहीं दिया। इसके बावजूद उसे लौटा दिया गया।
चौथा, इस लौटाने को इमरान खान ने शांति और वार्ता की पहल कहा और सारी दुनिया की वाहवाही लूट ली। पांचवां, मोदी ने पुलवामा-कांड का बदला लेने की जो सख्त धमकियां दी थीं और बालकोट- जैसे आतंकी अड्डों पर हमला कर पाकिस्तानियों की नजर में इमरान खान की छवि जो एकदम पतली कर दी थी याने राजनीतिक चौका मार दिया था, उस पर अभिनंदन को रिहा करके इमरान ने कूटनीतिक छक्का मार दिया। एक मायने में इन दोनों अलग-अलग घटनाओं का अपनी-अपनी जनता पर असर एक-जैसा हो गया।
छठा, यों तो अभिनंदन पाकिस्तान के एफ-16 विमान को गिराकर अपने विमान सहित वापस लौटते तो भारत उनका स्वागत किसी परमवीर की तरह करता लेकिन विमान गिरने या टकराने या गिराए जाने के बावजूद भारत के लोग उनकी वापसी पर खुश हो रहे हैं और पाकिस्तान को गालियां नहीं दे रहे हैं, इससे दोनों देशों में तनाव कम हो रहा है। सांतवा, टीवी चैनलों की कृपा से अभिनंदन की वापसी भारत-पाक के बीच सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है। असली मुददा याने आतंकवाद पीछे सरक गया है। किसी भी टीवी बहस में यह चर्चा नहीं हो रही है कि आगे क्या किया जाए या कश्मीरी आतंकवाद पर कैसे काबू पाया जाए ? आठवां, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी यह माना जा रहा है कि भारत और पाक के बीच अभिनंदन के मुद्दे के कारण शायद अब मुठभेड़-विराम हो जाए।
डॉ. वेदप्रताप वैदिक
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं, ये उनके निजी विचार हैं)




















