चीन से बढ़ते तनाव के बीच दोनों देशों के मध्य आर्थिक गतिविधियों पर संकट के बादल छाये हैं। भारत इस अवसर का उपयोग चीन की अपनी आर्थिक स्थिति पर निर्भरता कम करने के लिए कर सकता है। चीनी सामान का बहिष्कार का नारा तो आसान लगता है और देशहित में चीनी सामान का बहिष्कार होना चाहिए। परंतु हमें इसका विकल्प भी तैयार करना होगा। विकल्प के तौर पर पुराने लीक पर चलना भविष्य के लिए नुकसानदायक साबित होगा। चीन पर से निर्भरता हटाकर किसी अन्य देश प आयात के लिए निर्भर हो जाना बुद्धिमाापूर्ण नहीं है। हमें इस अवसर का लाभ आत्मनिर्भरता के लिए करना चाहिए। हमने कई क्षेत्रों में कोविड संक्रमण के दौरान आत्मनिर्भरता प्राप्त किया है। हमने मास्क, पीपीई किट, जांच किट, वेंटीलेटर आदि का उत्पादन करके आयात पर निर्भरता कम की है। बस भारतीय उद्यमियों को बाजार चाहिए। यदि अनुकूल माहौल और बाजार मिले तो भारत आत्मनिर्भरता की मंजिल तक आसानी से पहुंच सकता है। निर्माण, सेवा, मैन्युफैचरिंग आदि क्षेत्र में तो हम चीन पर अपनी निर्भरता कम कर सकते हैं।
इलेट्रिक सामान, गैजेट, दूरसंचार उपकरण आदि में हम अपनी तकनीकी का उपयोग करके आत्मनिर्भर हो सकते हैं परंतु जो क्षेत्र जरूरी है जैसे दवा आदि, वहां हमें आत्मनिर्भरता के लिए तेजी से कदम बढ़ाना चाहिए योंकि यदि दोनों देशों में तनाव बढ़ता है तो हो सकता है कि आयात पर भी असर पड़े। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा दवा निर्माता देश है परन्तु एक आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि जिस पर विश्वास नहीं होता कि भारत दवा बनाने के लिए अस्सी प्रतिशत कच्चा माल चीन से आयात करता है। यहां तक कि पैरासिटामाल व एंटीबायटिक जैसी साधारण दवाइयों पर हम चीन पर निर्भर हैं। ऐसे में यदि चीन की तरफ से भारत को निर्यात रोक दिया जाय तो हमारे औषधि उद्योग का या होगा! हमारे देश की स्वास्थ्य सेवाओं पर भी प्रभाव पड़ सकता है। यही हाल मेडिकल उपकरणों का भी है। यदि चीन से आयात कम हुआ या रुक गया तो तत्काल में परेशानी उठानी पड़ सकती है। इसके लिए भारत के उद्यमियों को देश की अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए हाथ बढ़ाना होगा। यह उद्यमियों के लिए देशसेवा का सुनहरा अवसर है।
जहां उद्यमियों को अपना प्रयास करना होगा, वहीं सरकार को भी उद्यमियों को रियासत पर बिजली, पानी, जमीन, सुरक्षा जैसे मूलभूत सुविधाएं उपलध करानी होगी। साथ में कर में छूट, रियायती दर पर सुविधाएं भी सरकार को मुहैया करना होगा, तभी चीन जैसे देश से प्रतिस्पर्धा में भारतीय उद्योग अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खड़ा हो पाएगा। भारत सरकार ने उद्यमियों को बढ़ावा देने के लिए जेम पर वोकल फॉर लोकल की नीति को बढ़ावा दिया है। गवर्नमेंट ई-मार्केट प्लस पर बिकने वाले हर उत्पाद पर उसके देश का नाम लिखा हो। उत्पादन का मूल स्थान का जिक्र करने पर ही उत्पाद जेम पर पंजीकृत हो पायेगा। इसके साथ ही जेम पर मेक इन इंडिया का फिल्टर लगा दिया गया है।
इससे खरीदार स्वेदश निर्मित वस्तुओं का पहचान करके आसानी से खरीद सकेंगे। इस कदम से चीन से आयातित उत्पाद पर अपना ठप्पा लगाकर बेचने वालों पर रोक लगेगी। बहुत सी कंपनियां चीन से उत्पाद आयात करके अपने ब्रांड नाम से बेचती हैं। केंद्र सरकार ने पब्लिक प्रोयोरमेंट नार्म्स में बदलाव करते हुए इन कंपनियों के उत्पादों को वरीयता देने का निर्णय लिया है जिसमें कम से कम पचास प्रतिशत स्थानीय अवयव हो। प्रदेश सरकार ने भी उद्यमियों को सुविधाएं, रियायतें व अवसर देने का निर्णय लिया है। एक जिला एक उत्पाद के तहत उद्यमियों को विभिन्न सुविधाएं देकर प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्हें ऐसे अवसर प्रदान किये जा रहे हैं जिससे उनके उत्पाद चीनी या अन्य अंतर्राष्ट्रीय उत्पाद से गुणवत्ता व मूल्य में प्रतिस्पर्धा कर सकें।




















