
कृषि की उन्नति को केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए तीन कृषि कानूनों को लेकर किसान आंदोलित हैं। उनकी आशंका है कि सरकार द्वारा बने इन कानूनों का कंपनियों द्वारा दुरुपयोग हो सकता है। इसी चिंतन को लेकर जहां पंजाब, हरियाणा, राजस्थान आदि राज्यों के किसान कानून वापसी व फसलों को एमएसपी पर बेचने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। वहीं केंद्र में साारुढ भाजपा सरकार का यह प्रयास है कि किसानों को इन कानूनों का महत्व बताकर यह समझाया जाए कि ये कानून किसानों की उन्नति में सहायक होंगे। आंदोलित किसानों की मांग है सरकार इन कानून को वापस लेकर फसलों की एमएसपी निर्धारित करे और कानून में यह शामिल करे कि एमएसपी से कम फसल खरीदने वालों पर कानूनी कार्रवाई करे। अब भाजपा सरकार आंदोलित किसानों को समझाने के लिए नीति अपना रही है, कि पार्टी के नेता जिला स्तर पर किसान सभाओं का आयोजन करके किसानों को इन कानून का महत्व समझाएं। इसकी पहल करते हुए शुक्रवार को पीएम मोदी ने वीडियो कांफ्रेंस कर मध्यप्रदेश के किसानों को संबोधन करते हुए यह बताने का प्रयास किया कि एमएसपी किसी भी हाल में बंद नहीं होगी। उन्होंने इस आंदोलन के लिए किसानों उकसाने में विपक्षी पार्टियों पर हमला करते हुए यह भी दावा किया पिछली सरकार के मुकाबले में मौजूदा सरकार किसानों को ज्यादा एमएसपी दे रही है।
पीएम मोदी के इस वतव्य पर आंदोलित किसान विश्वास करने को तैयार नहीं है। किसानों की मंशा है कि सरकार संसद का आपातकालीन सत्र बुलाकर एमएसपी को कानूनी दर्जा दे। जब तक सरकार इस पर अमल नहीं करेगी वह आंदोलन खत्म नहीं कर सकते। कड़ाके की सर्दी के बावजूद किसान टस से मस होने को तैयार नहीं है। सरकार की बात किसानों के मस्तिष्क में आ जाए और वह अपने आंदोलन को वापस लेकर घरों को वापस चले जाएं। इसी चिंतन में जहां प्रधानमंत्री मोदी ने एमपी के किसानों से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए वार्ता की और यह भी वादा किया वह किसानों की आशंकाओं को दूर करने के लिए तैयार हैं, वहीं भाजपा ने किसानों को मनाने के लिए किसान सभा के आयोजन का अभियान भी चलाया है। भाजपा नेताओं ने अभियान का श्रीगणेश करते हुए पश्चिमी उार प्रदेश के किसानों को देश की क्रांतिधरा मेरठ में बुलाकर यह समझाने का प्रयास किया, कि ये कानून उनके हित में है। सरकार की प्राथमिकता किसानों की उन्नति करना है। इस अभियान का शुरू करना मोदी सरकार की सोची-समझी नीति का हिस्सा है।
मोदी सरकार चाहती है कि आंदोलन में आने वाले किसानों को इन बैठकों के जरिए समझा-बुझाकर कानून का महत्व बताएं। जिससे आंदोलन में आने की इच्छा रखने वाले किसान न आ सकें दूसरे जो आंदोलन में डटे हैं वह भी इसका महत्व समझकर घर जाने शुरू हो जाएंगे। दूसरे इन बैठकों में विपक्षी पार्टियों पर किसानों को आंदोलन के लिए उकसाने का आरोप लगाकर राजनीति को हवा दी जाएगी। भाजपा के किसान सभा अभियान व किसानों को रिझाने के बावजूद आंदोलित किसान अपनी मांग पूरी होने तक टस से मस होने को तैयार नहीं है। सबसे काबिले गौर बात यह कि हरियाणा की भाजपा इकाई में किसानों के आंदोलन को लेकर विरोधी स्वर उभरने लगे हैं भाजपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री व राज्यसभा के सांसद चौधरी वीरेंद्र सिंह का धरने में शामिल होना व यह कहना कि किसानों का हित पार्टी व राजनीति से सर्वपरि होना इस बात का संकेत है कि भाजपा के कुछ नेता भी किसानों की मांगों को जायज मान रहे हैं। ऐसा लग रहा है कि आंदोलन जितने दिन चलेगा यह उतना ताकतवर होगा। बहरहाल किसान अपनी मांग व सरकार अपनी जिद पर अडिग है। कौन झुकेगा यह तो आने वाला समय ही बताएगा।




















