सूर्यग्रह का राशि परिवर्तन (16 अगस्त से 16 सितम्बर तक )

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सूर्यग्रह का प्रवेश कर्क राशि से स्वराशि सिंह में
विश्वपटल पर देखने को मिलेंगी अप्रत्याशित घटनाऍं
मिथुन, तुला, वृश्चक एवं मीन राशि वालों को होगा भाग्योदय

  • ज्योतिषविद् श्री विमल जैन

ज्योतिष शास्त्र में सूर्यग्रह का नवग्रहों में महत्वपूर्ण स्थान है। ज्योतिष की मान्यता के अनुसार सूर्यग्रह मेष राशि से मीन राशि तक प्रत्येक मास राशि बदलते हैं। जिसका व्यापक प्रभाव पूरे विश्व में देखने को मिलता है। प्रख्यात ज्योतिर्विद् श्री विमल जैन ने बताया कि सूर्यग्रह कर्क राशि से सिंह राशि में 16 अगस्त, शनिवार को अर्द्धरात्रि के पश्चात् 1 बजकर 53 मिनट पर प्रवेश करेंगे जो कि 16 सितम्बर, सोमवार को अर्द्धरात्रि के पश्चात् 1 बजकर 48 मिनट तक इसी राशि में रहेंगे। सूर्यग्रह मघा नक्षत्र एवं सिंह राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य संक्रानि का विशेष पुण्यकाल अगले दिन 17 अगस्त, शुक्रवार को रहेगा। सूर्य संक्रान्ति के दिन स्नान-ध्यान करके दान करना पुण्य फलदायी रहता है। ज्योतिषविद् श्री विमल जैन जी ने बताया कि इस दिन सूर्य, केतु-सिंह राशि में; चन्द्रमा वृषभ राशि में; मंगल-कन्या राशि में; बुध-कर्क राशि में; गुरु, शुक्र-मिथुन राशि में शनि-मीन राशि में एवं राहु-कुम्भ राशि में विराजमान रहेंगे। नवग्रहों के योग के फलस्वरूप सम्पूर्ण विश्वपटल पर व्यापक असर देखने को मिलेगा। सूर्यग्रह की सिंह राशि स्वराशि है। शनिग्रह मीन राशि में एवं सूर्यग्रह सिंह राशि में होने के फलस्वरूप षडाष्टक योग बन रहा है। शनि-सूर्य आपस में पिता-पुत्र होते हुए भी मैत्रीय सम्बन्ध नहीं रहता। षडाष्टक योग के फलस्वरूप अनेकानेक अप्रत्याशित घटनाओं से रूबरू होना पड़ेगा। विश्व में राजनैतिक क्षेत्र एवं देश-विदेश के राजनैतिक घटनाक्रम में विशेष उथल-पुथल का दौर रहेगा। विश्व के कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष अपने विपक्ष की भूमिका से कठिनाइ महसूस करेंगे। दैविक प्राकृतिक आपदाओं की भरमार के साथ ही अग्निजन्य घटनाओं से जनमानस परेशान रहेगा। देश-विदेश में कहीं-कहीं पर सत्ता परिवर्तन, छत्रभंग एवं शीतयुद्ध जैसी स्थिति की आशंका बनी रहेगी। मौसम में अजीबो-गरीब परिवर्तन से कहीं-कहीं पर वर्षा, भू-स्खलन एवं भूकम्प की आशंका को नकारा नहीं जा सकता। जल-थल वायु दुर्घटनाओं की आशंका रहेगी। शेयर, धातु एवं मुद्रा बाजार, खाद्य एवं तेल पदार्थों में विशेष उथल-पुथल से जन-मानस आक्रोशित रहेगा। ज्योतिषविद् श्री विमल जैन जी ने बताया कि सूर्य के राशि परिवर्तन से द्वादश राशियाँ भी प्रभावित होंगी। मिथुन, तुला, वृश्चिक एवं मीन राशि वालों के लिए सफलता का सुयोग बनेगा।

मेष – व्यावसायिक पक्ष से निराश। कार्य क्षमता में प्रतिकूलता। मन अशान्त। नेत्र विकार। व्यर्थ भ्रमण। अन्य परेशानी।

वृषभ – आरोग्य प्रतिकूल। आपसी तालमेल का अभाव । व्यय की अधिकता। दाम्पत्य जीवन में तनाव । यात्रा में परेशानी।

मिथुन – आयोग्य सुख। परिस्थितियों में सुधार। आकस्मिक लाभ। नौकरी में पदोत्रति। कर्ज की निवृत्ति। यात्रा सफल।

कर्क – स्वास्थ्य प्रभावी। नेत्र विकार। धनागर का अभाव। अर्थिक कठिनाइयां प्रभारी। वाद विवाद संभाव। यात्रा निष्फल।

सिंह – ग्रहस्थिति असंतोषजनक। उलझनें प्रभावी। विरोधी प्रभावी। पुरुषार्थ में अरुचि। आर्थिक पक्ष से कष्ट। अपयश सम्भव।

कन्या- शारीरिक सुख में कमी। आपसी तालमेल का अभाव। सन्तान पक्ष की चिन्ता। क्रोध से तनाव। यात्रा में प्रतिकूलता।

तुला – कार्य-व्यवसाय में लाभ। प्रेम सम्बन्धों में प्रगाढ़ता। कर्ज अदायगी का प्रयास। मनोरंजन में रुचि। यात्रा सार्थक।

वृश्चिक – समय भाग्य के पक्ष में। आकस्मिक लाभ। स्वास्थ्य अनुकूल। नौकरी में पदोन्नति। कर्ज की निवृत्ति। यात्रा से लाभ।

धनु – मनोव्यथा, व्यय की अधिकता। व्यावसायिक चिन्ता। कार्य क्षमता में कमी। पारिवारिक मतभेद। यात्रा में निराशा।

मकर – वैचारिक स्थिरता में कमी। स्वास्थ्य को लेकर चिन्ता। पारिवारिक मतभेद उजागर। शारीरिक मानसिक कष्ट।

कुम्भ – समय आशा के प्रतिकूल। क्रोध की अधिकता। खर्च की अधिकता। अभिलाषा की पूर्ति में व्यवधान। मित्रों से अनबन ।

मीन – कार्य योजना में सफलता। नवीन योजना का श्रीगणेश। ज्ञान-विज्ञान में अभिरुचि। बुद्धि चातुर्य से विवाद का समापन।

जिन्हें जन्मकुण्डली में या गोचर से सूर्यग्रह विपरीत हों उन्हें अपने कार्यों में सूझ-बूझ व सावधानी रखनी चाहिए। शनिग्रह की

अढैया या साढ़ेसाती चल रही हो, उन्हें जोखिम के कार्यों से दूर रहना चाहिए। धन निवेश के लिए सावधानी के साथ सूझ-बूझ आवश्यक है।

सूर्यग्रह ऐसे होंगे प्रसन्न – सूर्यग्रह की कृपा प्राप्ति के लिए अपने आराध्य देवी-देवता की आराधना के साथ सूर्यग्रह की भी अर्चना नियमित रूप से करनी चाहिए। प्रातः काल स्नान, ध्यान के पश्चात् स्वच्छ वस्त्र धारण कर सूर्य भगवान को ताम्रपात्र में स्वच्छ जल या गंगाजल, रोली, अक्षत, लाल फूल एवं गुड़ डालकर अर्घ्य अर्पित करना चाहिए। साथ ही सूर्यमन्त्र का जप, श्रीआदित्यहृदय स्तोत्र, श्रीआदित्यकवच, श्रीसूर्यसहस्रनाम, सूर्य चालीसा आदि का पाठ भी करना चाहिए। रविवार के दिन शुचिता के साथ व्रत या उपवास रखना चाहिए। इस दिन 12 बजे से 3 बजे के मध्य बिना नमक का आहार या फलाहार ग्रहण करना चाहिए। मध्याह्न के समय संकल्प करके सूर्यग्रह से सम्बन्धित लाल रंग की वस्तुएँ जैसे- लाल वस्त्र, गेहूँ, गुड़, ताँबा, लाल फूल, चन्दन आदि विविध वस्तुएँ नगद दक्षिणा सहित ब्राह्मण को देना चाहिए।

ज्योतिर्विद् श्री विमल जैन

मो. 09335414722

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