महान क्रांतिकारी अशफ़ाक़ उल्ला ख़ाँ जी का साहस, सर्वोच्च बलिदान और अटूट राष्ट्रप्रेम सदैव हमें देश की एकता, भाईचारे और स्वतंत्रता के मूल्यों के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा देता रहेगा। 🇮🇳
वे काकोरी कांड (1925) के प्रमुख क्रांतिकारियों में शामिल रहे और अंग्रेज़ी शासन के विरुद्ध सशस्त्र क्रांति के प्रबल समर्थक थे। उनका जीवन भारत की गंगा-जमुनी तहज़ीब और राष्ट्रीय एकता का सशक्त संदेश देता है।
19 दिसंबर 1927 को उन्हें फ़ैज़ाबाद जेल में फाँसी दी गई। वे हँसते-हँसते मातृभूमि के लिए अपने प्राण न्योछावर कर गए और इतिहास में अमर हो गए।
अशफ़ाक़ उल्ला ख़ाँ का जीवन साहस, बलिदान, देशभक्ति और सांप्रदायिक सौहार्द का चिरस्थायी उदाहरण है। उनका बलिदान भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है।
वंदे मातरम्।जय हिन्द। 🇮🇳



















