शनि अमावस्या

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शनिवार के दिन शनि अमावस्या का अनूठा संयोग
शनिदेव की पूजा-अर्चना से बदलेगी किस्मत, मिलेगी सुख-समृद्धि, खुशहाली
1. शनैश्चरी अमावस्या से दिखेगी प्राकृतिक
2. मौसम में दिखेगा अजीबो-गरीब परिवर्तन
3.राजनेताओं में रहेगी आपसी खींचतान एवं मतैक्य का अभाव
4. कालसर्पदोष, शनिग्रहदोष व पितृदोष निवारण का है विशेष दिन

सृष्टि के संचालक प्रत्यक्षदेव भगवान सूर्यदेव के सुपुत्र श्रीशनिदेव जी की अराधना की विशेष महिमा है। वैसे तो शनिदेव जी की पूजा प्रत्येक शनिवार को विधि-विधानपूर्वक की जाती है। परन्तु शनि अमावस्या पर की गई पूजा-अर्चना विशेष फलदायी होती है। शनिवार के दिन पड़ने वाली अमावस्या तिथि को शनि अमावस्या के नाम से जानी जाती है। प्रख्यात ज्योतिर्विद् श्री विमल जैन जी ने बताया कि इस बार अमावस्या संयोगवश शनिदेव के विशेष दिन शनिवार, 4 मई को पड़ रही है। वैशाख कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि शुक्रवार, 3 मई को अर्द्धरात्रि के पश्चात 4 बजकर 04 मिनट पर लगेगी जो कि शनिवार, 4 मई को अर्द्धरात्रि के पश्चात 4 बजकर 16 मिनट तक रहेगी। अमावस्या तिथि शनिवार को सम्पूर्ण दिन रहेगी। स्नान-दान-श्राद्धा की अमावस्या शनिवार, 4 मई को ही है। शनैश्चरी अमावस्या के दिन शनिग्रह की विधि-विधान से की गई पूजा सुख, समृद्धिकारक होती है, साथ ही शनिग्रहजनतित दोषों से मुक्ति भी मिलती है। शनि अमावस्या पितृदोष की शान्ति के लिए श्रेयस्कर मानी गई है। शनि अमावस्या को कालसर्पदोष का निवारण करना विशेष लाभकारी रहता है।

प्रख्यात ज्योतिर्विद् श्री विमल जैन जी ने बताया कि वर्तमान समय में वृषभ एवं कन्या राशि पर शनिग्रह की अढ़ैया चल रही है, जबकि वृश्चिक, धनु एवं मकर राशि पर शनिग्रह की साढ़ेसाती का प्रभाव है। शनैश्चरी अमावस्या कठिन व विषम प्रभाव दिखानेवाली होती है। जनमानस को विश्व में अनेकानेक अप्रत्याशित विषम घटनाओं से रूबरू होना पड़ता है। प्राकृतिक एवं दैविक आपदाओं के साथ मौसम में भी अजीबोगरीब परिवर्तन देखने को मिलता है। यान-वाहन दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है। विश्व के प्रशासकों को शासन चलाने में मुश्किलें आ सकती हैं, जिससे छत्रभंग की आशंका भी बनी रहती है। राजनेताओं में आपसी मतैक्य का अभाव बना रहेगा। राजनीति के क्षेत्र में नये समीकरण बनते हैं। कहीं-कहीं पर जन-आन्दोलन का भी संकट बना रहेगा। शेयर मार्केट, वायदा व धातु बाजार में विशेष उथल-पुथल के साथ ही अन्य अकल्पित घटानाएं देखने को मिलेगी।

ऐसे होंगे शनिदेव प्रसन्न – प्रख्यात ज्योतिर्विद् श्री विमल जैन जी ने बताया कि आस्थावान व्रतकर्ता को प्रातःकाल स्नान ध्यान व अपने आराध्य देवी-देवता की पूजा-अर्चना के पश्चात शनिवार का संकल्प लेना चाहिए। सम्पूर्ण दिन निराहार रहकर सायंकाल पुनः स्नान करके शनिदेव की विधि-विधान से पूजा करने के पश्चात उनको काले रंग की वस्तुएं जैसे- काला वस्त्र, काला साबूत उड़द, काला तिल, सरसों का तेल या तिल का तेल, काला छाता, लोहे का बर्तन एवं अन्य काले रंग की वस्तएं अर्पित करना लाभकारी रहता है। इस दिन शनिदेव के मंदिर में सरसों के तेल से शनिवार का अभिषेक करना तथा तेल की अखण्ड ज्योति जलाना चाहिए उत्तम फलदायी माना दया गै। सायंकाल शनिदेव के मंदिर में पूजा करके दीपक प्रज्वलित करना चाहिए।

इन वस्तुओं का करें दान – शनिग्रह से सम्बन्धित वस्तुओं का दान सायंकाल पश्चिम दिशा की ओर मुख करके का विधान है। दान करने से शनिदेव प्रसन्न होकर भक्त को मंगल कल्याण के आशीर्वाद से अभिभूत करते हैं। जन्मकुण्डली में शनिग्रह की उत्तम स्थिति ऐश्वर्य एवं वैभव प्रदाता होती है। व्यक्ति समस्त भौतिक सुख मिलते हैं। जिन्हें जन्मकुण्डली के अनुसार शनिग्रह प्रतिकूल हों या शनिग्रह की महादशा का अनुकूल फन न मिल रहा हो, उन्हें अपने आराध्य देवी-देवता की पूजा-अर्चना करने के पश्चात शनिवेद की पूजा का संकल्प लेकर व्रत उपवास रखकर शनिदेव की आराधना अवश्य करनी चाहिए। जिससे उसका जीवन सुखमय होता है। इसी दिन पीपल के वृक्ष व भगवान शिवजी व श्रीविष्णु जी की पूजा-अर्चना के साथ पीपल वृक्ष की 108 परिक्रमा करने पर आरोग्य व सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

शनिग्रह के मन्त्रों का जप करना होगा फलकारी –

1. ऊँ शं शनैश्चराय नमः
2. ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनये नमः
3. ऊँ मनो भगवते शनैश्चराय सूर्यपुत्राय नमः
4. ऊँ ऐं ह्रीं श्रीं शनैश्चराय नमः

शनि भगवान से सम्बन्धित राजा दशरथ कृत शनिस्तोत्र, शनि चालीसा का पाठ व शनिदेव जी की आरती करनी चाहिए। इस दिन काले उड़द के दाल की खिचड़ी गरीबों में अवश्य वितरित करनी चाहिए। साथ ही काले रंग की वस्तुओं का दान भी करना चाहिए। शनिग्रहजनित दोषों के शमन के लिए आज अमावस्या तिथि के दिन शनिदेव की विशेष पूजा-अर्चना करके रगीबों में काले रंग की वस्तुओं का दान करना चाहिए।

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