कुशोत्पाटनी / श्राध्द की अमावस्य : 22 अगस्त, शुक्रवार
स्नान-दान की शनैश्चरी अमावस्य : 23 अगस्त, शनिवार को
108 बार पीपल वृक्ष की परिक्रमा एवं पूजा से मिलगी खुशहाली, कटेंगे कष्ट
भगवान शिवजी, श्रीविष्णु जी तथा पीपल वृक्ष की पूजा से होगी मनोकामना पूरी
ज्योतिर्विद् श्री विमल जैन
भारतीय संस्कृति के सनातन धर्म में हिन्दू धर्मशास्त्रों के अनुसार हर माह के तिथि के पर्व की विशेष महिमा है। प्रख्यात ज्योतिषविद् श्री विमल जैन जी ने बताया कि द्वादश मास की अमावस्या तिथि में कुशोत्पाटनी अमावस्या की विशेष महत्ता है। भाद्रपद कृष्णपक्ष की अमावस्या तिथि कुशोत्पाटनी अमावस्या तिथि के नाम से जानी जाती है। इस अमावस्या तिथि पर ब्राह्मण वर्ग देव एवं पितृ तथा धार्मिक व मांगलिक कृत्यों को सम्पन्न करने व सम्पादित करवाने के लिए कर्मकाण्डी ब्राह्मण विद्वान् कुश का उत्पाटन करते हैं। धार्मिक कृत्यों में प्रयोग करने के लिए कुशा नामक घास का उत्पाटन आज के दिन शुभ मुहूर्त में किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन उत्पाटित की हुई कुशा नामक घास वर्ष भर शुद्ध रहती है। कुशा का उत्पाटन दिन के द्वितीय प्रहर में श्वेत वसा धारण कर उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके दाहिने हाथ से किया जाता है। उत्पाटन के पूर्व मना का जप भी करना चाहिए। वर्षभर इसी कुशा नामक घास का प्रयोग हिन्दुओं के धार्मिक अनुष्ठानों में किसी न किसी रूप में अवश्य होता है। भाद्रपद की अमावस्या तिथि के दिन ही कुश का उत्पाटन किया जाता है।
ज्योतिषविद् श्री विमल जैन जी ने बताया कि भाद्रपद कृष्णपक्ष की अमावस्या तिथि शुक्रवार, 22 अगस्त को दिन में 11 बजकर 57 मिनट पर लगेगी जो कि अगले दिन शनिवार, 23 अगस्त को दिन में 11 बजकर 37 मिनट तक रहेगी। इस बार शुक्रवार, 22 अगस्त को कुशोत्पाटनी/श्राद्धादि की अमावस्या तथा शनिवार, 23 अगस्त को स्नान दानादि की शनैश्चरी अमावस्या का पर्व मनाया जाएगा। शनिवार के दिन अमावस्या तिथि का संयोग होने पर जन्मकुण्डली में उपस्थित कालसर्पदोष का निवारण करना भी शुभ फलकारी माना गया है।
पीपल वृक्ष की है विशेष महिमा – पीपल वृक्ष में समस्त देवताओं का वास माना गया है। अमावस्या तिथि पर विधि-विधान पूर्वक पितरों की भी पूजा-अर्चना की जाती है। पितरों के आशीर्वाद से जीवन में भौतिक सुख-समृद्धि, खुशहाली मिलती है। इस दिन पीपल के वृक्ष व भगवान् शिवजी व श्रीविष्णु जी की पूजा-अर्चना के साथ पीपल वृक्ष की 108 परिक्रमा करने पर आरोग्य व सौभाग्य की प्राप्ति होती है। आज के दिन शिवपूजा भी कल्याणकारी होती है। शिवजी का रुद्राभिषेक भी आज के दिन करवाना लाभकारी माना गया है। इस दिन व्रत उपवास रखकर इष्ट देवी देवता एवं आराध्य देवी देवता की पूजा अर्चना अवश्य करनी चाहिए।
आज क्या करें विशेष – आज अमावस्या तिथि पर ब्राह्मण को घर पर निमनिात करके भोजन करवाने की विशेष धार्मिक मान्यता है। ब्राह्मण को भोजन करवाकर सफेद रंग की वस्तुओं का दान जैसे- चावल, नमक, शुद्ध देशी शी, दूध, मिश्री, चीनी, खोवे से बने सफेद मिष्ठान, सफेद वसा, चाँदी एवं अन्य सफेद रंग की वस्तुएं दक्षिणा के साथ देकर, उनका चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लेना चाहिए। किसी कारणवश यदि ब्राह्मण को भोजन न करवा सकें तो उस स्थिति में उन्हें भोजन सामग्री (सिद्धा) के साथ नकद द्रव्य देकर पुण्य लाभ प्राप्त करना चाहिए।
अमावस्या तिथि के दिन अपनी जीवनचर्या नियमित संयमित रखकर अपने परम्परा के अनुसार समस्त धार्मिक अनुष्ठान सम्पादित करना चाहिए। पीपल के वृक्ष की पूजा का आज विशेष महत्व है। पीपल वृक्ष पूजा के मन् – ॐ मूलतो ब्रहारूपाय मध्ये विष्णुरूपिणे अग्रतो शिवरूपाय पीपलाय नमो नमः। आज के दिन व्रतकर्ता को अपनी दिनचया नियमति व संयमित रखते हुए यथासम्भव गरीबों, असहायों और जरूरतमंन्दों की सेवा व सहायता तथा परोपकार के कृत्य अवश्य करने चाहिए। जिससे जीवन में सुख-समृद्धि, खुशहाली बनी रहे।


















